शांति मंत्र

ये तीन मंत्र उपनिषदों से लिए गए हैं और शांति, प्रकाश और एकता की प्रार्थना करते हैं। अनेक लोग इन्हें दिन की शुरुआत या अध्ययन से पहले बोलते हैं।

असतो मा सद्गमय

असतो मा सद्गमय ।तमसो मा ज्योतिर्गमय ।मृत्योर्मामृतं गमय ॥

अर्थ: मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो, और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।

पूर्णमदः पूर्णमिदम्

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

अर्थ: वह (परब्रह्म) पूर्ण है और यह (जगत) भी पूर्ण है। पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है, और पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।

सह नाववतु

ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै ।तेजस्विनावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अर्थ: ईश्वर हम दोनों (गुरु और शिष्य) की साथ-साथ रक्षा करें और साथ-साथ पालन करें। हम साथ मिलकर पूरी शक्ति से कार्य करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो और हम आपस में द्वेष न करें। ॐ शांति, शांति, शांति।

स्रोत और टिप्पणी

संस्कृत पाठ विकिस्रोत से लिया गया है और सार्वजनिक (public domain) है। असतो मा सद्गमय बृहदारण्यक उपनिषद (1.3.28) से है, पूर्णमदः ईशोपनिषद की शांति-प्रार्थना है, और सह नाववतु कृष्ण यजुर्वेद की उपनिषद-परंपरा में पढ़ा जाता है। अर्थ हमारे अपने शब्दों में हैं।

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