मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।
आज का छोटा अभ्यास: आज जब कोई असुविधा या झटका आए, तो खुद से कहें: यह भी गुज़र जाएगा। बिना प्रतिक्रिया दिए थोड़ी देर धैर्य रखें।
हर दिन गीता का एक श्लोक, उसका सरल अर्थ और दिन भर के लिए एक छोटा अभ्यास। श्लोक आपकी तारीख के अनुसार बदलता है।
आज
अध्याय 2, श्लोक 63क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः ।स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥
अर्थ: क्रोध से मोह होता है, मोह से स्मृति भ्रमित होती है, स्मृति के भ्रम से बुद्धि का नाश होता है और बुद्धि के नाश से मनुष्य का पतन हो जाता है।
आज का छोटा अभ्यासजब गुस्सा उठे, तो कुछ बोलने या भेजने से पहले दस धीमी साँसें लें।
हर श्लोक का पूरा पाठ और अर्थ गीता के श्लोक पृष्ठ पर है। सभी श्लोक अर्थ सहित पढ़ें.
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।
आज का छोटा अभ्यास: आज जब कोई असुविधा या झटका आए, तो खुद से कहें: यह भी गुज़र जाएगा। बिना प्रतिक्रिया दिए थोड़ी देर धैर्य रखें।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
आज का छोटा अभ्यास: आज एक काम चुनें और उसे पूरे मन से करें, बिना प्रशंसा या परिणाम की प्रतीक्षा किए।
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनंजय ।
आज का छोटा अभ्यास: आज सफलता और असफलता, दोनों को एक ही शांत भाव से लें, फिर अगले काम पर बढ़ जाएँ।
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते ।
आज का छोटा अभ्यास: आज ध्यान दें कि आप किस बात को बार-बार सोच रहे हैं। उसे चिड़चिड़ाहट बनने से पहले छोड़ दें।
क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
आज का छोटा अभ्यास: जब गुस्सा उठे, तो कुछ बोलने या भेजने से पहले दस धीमी साँसें लें।
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
आज का छोटा अभ्यास: आज अपना कर्तव्य अपने ढंग से निभाएँ, किसी और के रास्ते से तुलना किए बिना।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
आज का छोटा अभ्यास: आज एक छोटा-सा काम सही के पक्ष में करें, चाहे किसी को पता न चले।
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आज का छोटा अभ्यास: आज खुद से एक प्रोत्साहन की बात कहें, जैसे आप किसी करीबी मित्र से कहते।
बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।
आज का छोटा अभ्यास: आज खुद से किया एक छोटा वादा निभाएँ और देखें कि इससे अपने पर भरोसा कैसे बढ़ता है।
असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् ।
आज का छोटा अभ्यास: आज पाँच मिनट शांत बैठें। जब भी मन भटके, उसे धीरे से वापस लाएँ।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
आज का छोटा अभ्यास: आज किसी एक चिंता को प्रार्थना या चिंतन में सौंप दें, और फिर हल्के मन से अपना दिन बिताएँ।
यह एक सांस्कृतिक और चिंतन का अभ्यास है। यह किसी चिकित्सा या पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।